लखनऊ | समय न्यूज़ ब्यूरो उत्तर प्रदेश की राजनीति में उमाशंकर सिंह महज एक विधायक नहीं, बल्कि बहुजन समाज पार्टी का वह आखिरी किला हैं जो विधानसभा में मजबूती से डटा हुआ है। बुधवार सुबह उनके आवास पर आयकर विभाग की दस्तक ने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि कई अनसुलझे सवाल भी खड़े कर दिए हैं।सूत्रों के हवाले से जिस 'डायरी' की चर्चा हो रही है, यदि वह सच साबित होती है, तो उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में एक बड़ा 'क्लीन-अप' या 'विस्फोट' देखने को मिल सकता है। अफसरों के नाम दर्ज होना इस बात की ओर इशारा करता है कि जांच की आंच दूर तक जाएगी।हालांकि, इस पूरी कार्रवाई का एक मानवीय और राजनीतिक पक्ष भी है। विधायक उमाशंकर सिंह वर्तमान में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से लड़ रहे हैं। ऐसे नाजुक वक्त में जांच एजेंसियों की यह सक्रियता उनके समर्थकों और विपक्ष को 'राजनीतिक प्रतिशोध' का आरोप लगाने का मौका देती है। क्या यह महज एक वित्तीय जांच है या इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक पटकथा लिखी जा रही है?जनता और मीडिया की नजरें अब आयकर विभाग के आधिकारिक बयान पर टिकी हैं। क्या यह रेड केवल दस्तावेजों तक सिमट जाएगी या उत्तर प्रदेश की नौकरशाही का कोई नया 'पांडोरा बॉक्स' खुलेगा?
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