समस्त झारखंड मना रहा है बिनोद बिहारी महतो व राजकिशोर महतो की जयंती, घर का होनहार किशोरावस्था में ही चल बसा

City: Dhanbad | Date: 23/09/2021
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समय न्यूज़ 24 डेस्क धनबाद

बिनोद बिहार महतो के प्रपौत्र व राजकिशोर महतो के पौत्र की ब्रेन इंज्यूरी की वजह से हो गई मौत, पसरा मातम 

 आज 23 सितंबर है। आज ही के दिन पूर्व सांसद व झारखंड आंदोलनकारी बिनोद बिहारी महतो का जन्म हुआ था। आज ही उनके पुत्र व सांसद और विधायक रहे राजकिशोर महतो की भी जयंती है। पिता-पुत्र की जयंती आज पूरे झारखंड में मनायी जा रही है। खासकर, बिनोद बिहारी महतो के लिए तो सैंकड़ों जगह कार्यक्रम आयोजित होने जा रहे हैं। लेकिन, दुर्भाग्य देखिए, इस परिवार की चौथी पीढ़ी का चिराग आज के ही दिन बुझ गया। 

मिली जानकारी के अनुसार, बिनोद बिहारी महतो के प्रपौत्र व राजकिशोर महतो के पौत्र हर्ष ने आज सुबह धनबाद के बरटांड़ स्थित एशियन जालान सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल में अंतिम सांस ली। हर्ष, राजकिशोर महतो के मंझले पुत्र राजेश कुमार का बड़ा संतान था और कोयलानगर स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल का बारहवीं (काॅमर्स) का छात्र था।   

 विगत, 10 सितंबर को हर्ष अपने किसी मित्र का जन्मदिन मनाने मैथन जा रहा था। इसी क्रम में तेतुलिया के समीप सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया। उसमें हर्ष को सिर में गंभीर चोट लग गई। तब से उसका इलाज एशियन जालान सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल में चल रहा था। गुरूवार की सुबह लगभग साढ़े सात बजे उसकी सांस उखड़ गई और वह चिरनिद्रा में सो गया। हर्ष अपने माता-पिता के दो पुत्रों में ज्येष्ठ था। उसकी मौत की खबर, बिनोद बिहारी महतो एवं राजकिशोर महतो के परिवार से जुड़े लोगों एवं शुभचिंतकों के लिए स्तब्ध कर देने वाली रही। जानकारी पाकर लोगों की भीड़ अस्पताल परिसर में जुट गई है।

राजकिशोर बाबू के घर को लग गई किसकी नजर- 10 महीने में चार मौतें

महतो परिवार के करीबी बताते हैं कि राजकिशोर बाबू के परिवार को पता नहीं किसकी नजर लग गई कि महज 10 महीने में परिवार में चार लोगों की मौत हो गई है। विगत दो दिसंबर, 2020 को राजकिशोर महतो का निधन हो गया। उनकी मौत के दो ही महीने के बाद उनकी बहन और बिनोद बिहारी महतो की पुत्री का रांची में देहांत हो गया। गत 21 अप्रैल, 2021 को राजकिशोर महतो के ज्येष्ठ पुत्र राजनीश महतो उर्फ बबलू का आकस्मिक देहावसान हो गया। आज 23 सितंबर को राजकिशोर बाबू के पौत्र की मृत्यु हो गई। एक ही परिवार से चार-चार मौतें, वह भी केवल 10 महीने के अंतराल में अबूझ पहेली जैसी है।

 


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